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अष्टभुजा शुक्ल का जीवन वृत्तांत
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अष्टभुजा शुक्ल की एक और कविता पढ़िए -
जीवन वृत्तांत
उठाया ही था पहला कौर
कि पगहा तुड़ाकर भैंस भागी कहीं और
पहुंचा ही था खेत में पानी
कि छप्पर में आग लगी...
2 hours ago
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कविता ; प्रेम जहाँ बसते दिन-रात – श्यामल सुमन
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मेहनत जो करते दिन-रात वो दुख में रहते दिन-रात सुख देते सबको निज-श्रम से
तिल-तिल कर मरते दिन-रात मिले पथिक को छाया हरदम पेड़, धूप सहते दिन-रात
बाहर से...
1 day ago
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अक्षरों की चोरी (कविता)
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*वे*
*बोरियों में भरकर*
*ले जा रहे हैं*
*हमारे अक्षरों को। *
*
*
*क्या तुम सुन रहे हो*
*उनका चिल्लाना ? *
*उनका रोना ? *
*उनका गिड़गिड़ाना ? *
*ओह! तुम सुन...
1 day ago
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नोटबुक !!
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दिसंबर की उस सर्द रात बिस्तर पर उसके बाजू में लेटा उसका नन्हा अचानक उससे
पूछता है "ऊपर भगवान् जी के पास डार्क ग्रे रजाई है पापा ! "
वो किसी किताब से बा...
1 day ago
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भोपाल कब आयेगा
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आजकल टेलीविजन पर अक्सर एक विज्ञापन आता है। इसमें एक बुजुर्गवार ट्रेन पर
चढ़्ते हैं। उनको भोपाल उतरना है। वे लोगों से पूछते रहते हैं कि भोपाल कब
आयेगा। लोग उ...
2 days ago
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६ साल पूरे हुए और हम जहाँ के तहाँ: मैं मोती होना नहीं चाहता!!!
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जब ३ मार्च २००६ को अपना ब्लॉग शुरु किया था तो बताया गया था कि बस एक साल की
मेहनत और फिर इससे कमाई शुरु हो जायेगी. बड़े मन से जुटे. फिर साल दर साल बीतते
गय...
5 days ago
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नए साल के आलमीरे से झाँकती पुराने साल की किताबें
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...पाले हुये अनगिनत रोगों की फ़ेहरिश्त में किताबों ने होश की पहली दहलीज़ से
ही शायद सबसे ऊपर वाला क्रमांक बनाए रखा है| वैसे कितनी दहलीजें होती हैं होश
की ...
3 weeks ago
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आलोचना के प्रश्नपत्र
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पता नहीं यह कविता कब लिखी थी, शायद ट्वेंटी-ट्वेंटी वाले दिनों में या उसके
भी पहले.
पहली जनवरी को जनसत्ता में प्रकाशित हुई.
अश्लीलता की कई सारी परिभाषाएं ...
1 month ago
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कहानी के इस भाग के प्रायोजक कौन है ?
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मैं कहानी में पूरी तरह से डूबा हुआ था.. या यू कह लीजिये कि मुझे तैरना आता
ही नहीं था.. एक छोटे से लकड़ी के तख्ते से लटका हुआ मैं आधा डूबा और आधा बचा
हुआ स...
4 months ago
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रुकी हुई रेल
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*हिलते पर्दे से छनकर रौशनी आती है , शीशे के बोल में अरालिया की एक लतर , किताबों
की टांड में एक ग्रॉसमन , रिल्के की ना समझी कोई कविता की एक अदद पंक्ति, चाय ...
5 months ago
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अनिकेत - निकेतन
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रोक लिया अपने अश्रु की धार को;
अनुभव किया जब नियति के प्रहार को,
एक सी करुणा थी उनकी आँखों में,
एक सा था भाव उनके चेहरे पर,
मातृ - पितृ विहीन है जीवन जिनका;
...
5 months ago
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सबद विशेष : १२ : उम्बेर्तो ईको
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* *
*उम्बेर्तो ईको यानी कल्पना का विज्ञान*
इतालवी लेखक उम्बेर्तो ईको ने जब पहला उपन्यास लिखा, तो उस समय उनकी उम्र लगभग
पचास साल थी। वह चिंतक और दार्शन...
5 months ago
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अपनी इच्छाओं की महक जिंदा रखा करो जान
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-> रेलवे ट्रैक को चीरकर धड़धडाती हुई जाती रेलें. रिमझिम रिमझिम होती बारिश.
और छतरीनुमा प्लेटफोर्म की बैंच पर बैठा मैं. कितना हल्का, कितनी राहत. देखा
जाए तो...
6 months ago
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AchchiKhabar.Com अब है AchhiKhabar.Com
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The beginning of
*AchhiKhabar.Com*
AchchiKhabar.Com पर अपना कीमती वक़्त देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद् . आपके
सहयोग से यह हिंदी भाषा में लिखे जाने Blo...
6 months ago
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दुनिया को बनाने वाला कोई भगवान नहीं...... स्टीफन हॉकिंग
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स्टीफन हॉकिंग
लंदन........ दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में गिने जाने वाले स्टीफन
हॉकिंग ने कहा है कि इस दुनिया को बनाने वाला कोई भगवान नहीं है। यह द...
1 year ago
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शादी करोगे तो पता चलेगा... हुंह!!
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[image: Sister, Brother & Me]Image by El_Sol via Flickr
*तीन साल बाद वो भूल जाती थीं... अब हम जब क्लास ६ में थे तो वो ९ में थीं, अब
भला हम उनके क्लास में तो...
1 year ago
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एक व्यंग्य :हरहुआ और टी० वी०
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हरहुआ और टी०वी० किसी गाँव में, एक ज़मींदार साहब रहते थे।काफी लम्बी-चौड़ी ज़मींदारी थी।परन्तु जब से ज़मींदारी उन्मूलन अभियान शुरु हुआ तो उनकी ज़मींदारी ख़त्म हो गई...
2 years ago
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आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 101
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[image: sunil handa story book stories from here and there in Hindi]
आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ
*संकलन – सुनील हांडा*
*अनुवाद – परितोष मा...
8 hours ago
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आजा, मन रंग डालें मिलकर।
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मन कहता है, आज ये मेरा
रंग डालूँ तुझे रंगों से अपने
बैंगनी, हरे, लाल,नीले, पीले
रंगों से सजा दूँ चेहरा तेरा।
खेलूँ रंग यूँ साथ मैं तेरे
भीगे तू भी संग में म...
1 day ago
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मेला मेला
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*कोई तो होता होगा, किताबों के पिटे सतरंगी मेलों, रात तीसरे पहर के झमेलों
में, बगल से गुनता कुछ गुनगुना जाता होगा; दुपहरिया के अंधेरों की थाह सुझाता,
थके...
1 day ago
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सुनिए दास्तानग़ोई
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कहां तो तय था चराग़ां हरेक घर के लिए
कहां चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए...
बिनायक सेन के खिलाफ़ राजद्रोह के मुकदमे पर सुनिए दानिश और फ़ारुकी की
दास्तानग...
6 days ago
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ख्यालों का दरिया-हिन्दी कविता
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खत अब हम कहाँ लिखते हैं, जज़्बातों को फोन पर बस यूं ही फेंकते दिखते हैं।
कहें दीपक बापू बोलने में बह गया ख्यालों का दरिया खाली खोपड़ी में लफ्जों का
पड़ गया है...
1 week ago
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मयख़ाने में भंभलभूसा
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ईर कहिन हम ब्लॉग बनाएँ,
बीर कहिन हमहूँ बिलॉग बनाएँ,
फ़त्ते कहिन हमहूँ बिलौग बनाएँ
हम कहा हमहूँ ब्ला....ग बनाएँ,
ईर बनाए एक ब्लाग,
बीर बनाए दुई ब्लाग,
फ़त्त...
2 weeks ago
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How to setup an eCommerce Store in India?
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Indian e-commerce sector is booming. I see a new online store every week.
Facebook ads are filled by new cloths, electronics, footwear etc. Number of
peo...
3 weeks ago
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ऐसी एक कविता
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जिसे टेडी बियर की तरह उछाल-उछाल
खेल सके एक बच्चा
जिसे बच्चे की किलकारी समझ
हुलस उठे एक मां
जो प्रतीक्षालय की किसी पुरानी काठ-बेंच की तरह
इतनी खुरदरी हो, इ...
1 month ago
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अदम जी मुझे लौकी नाथ कहते थे
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जयपुर में अदम जी मंच संचालन कर रहे थे। मुझे कविता पढ़ने बुलाने के पहले एक
किस्सा सुनाया। किसी नगर में एक बड़े ज्ञानी महात्मा थे। उनका एक शिष्य था नाम
था...
2 months ago
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सुरेश कलमाड़ी-अन्ना हज़ारे वार्तालाप !
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अन्ना हज़ारे की गिरफ़्तारी के बाद दिन भर सूचनाओं का सैलाब उमड़ता रहा. टीवी
चैनल,फ़ेसबुक,ट्विटर,सभी ओर से अलग अलग बातें आम आदमी तक पहुँचतीं रहीं.ये ख़बर
भी आई ...
6 months ago
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दैने बाले सिरी भगवान और इन्तलनेछनल फकील
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हफ़्ते के एक नियत दिन खताड़ी और उसके आसपास के मोहल्लों में भीख मांगने आने
वाला एक बूढ़ा इतनी ज़्यादा दफ़े अपनी बेहद सड़ियल और भर्राई हुई आवाज़ में
दैने बाल...
1 year ago
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लिखना जरूरी क्यों है?
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जब से ब्लॉगिंग से अल्पविराम(?) लिया है तब से कई मित्रों, पाठकों, शुभचिंतकों
ने कई तरीकों से उलाहना दिया है कि मैं लिखता क्यों नहीं। बीच में ऐसे ही कुछ
उलाह...
1 year ago
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'नीले गगन के तले' वाले रवि नहीं रहे..खुशदीप
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अलविदा रवि साहब
*जन्म-3 मार्च 1926 (दिल्ली)
निधन-7 मार्च 2012 (मुंबई)* ...
21 hours ago
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Wordpress audio player on blog/ ब्लॉग पर वर्डप्रेस ऑडियो प्लेयर
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आज की इस पोस्ट में हम सीखेंगे कि वर्डप्रेस ऑडियो प्लेयर को ब्लॉग में कैसे
इन्टीग्रेट करते हैं. पोस्ट थोड़ी टेक्नीकल है तो हम पहले आगाह किये देते हैं
कि आप ...
2 days ago
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सत्य
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“यदि मैं तुम्हें यह बताऊँ कि ऐसा कुछ है जो तुम्हें व्याप्त किये हुए है. तुम
उसे देख नहीं सकते लेकिन वह तुम्हारे अस्तित्व के लिए परम आवश्यक है”, गुरु ने
शिष...
5 days ago
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एक गीत : मुझसे मेरे गीतों का ....
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मुझसे मेरे गीतों का ,प्रिय ! अर्थ न पूछो
कहाँ कहाँ से हमें मिलें हैं, दर्द न पूछो
जब भी मेरे दर्दों को विस्तार मिला है
तब जाकर इन गीतों को आकार मिला है...
1 week ago
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छोटी पहचान लम्बा इंतज़ार....
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उबासियाँ लेते हुए मेनगेट का लॉक खोला और उसने एक लम्बी सांस ली . सुबह की
ताजा हवा की ठंडक कलेजे तक भर गयी . पेड पौधों को निहारते पीले गुलाब के फूल
पर उसकी न...
1 week ago
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अनंत
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अनंत एक अंक नहीं बल्कि एक प्रक्रिया है... एक सोच है... वो जो हर बड़े से बड़ा
हो... फिर कैसे परिभाषित करें इसे? कई बातें शायद मानव सोच के बाहर होती
हैं... ए...
1 week ago
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shri Panch kalyank Pratishta mahotsav
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सिद्धक्षेत्र सोनागिर जी में दिनांक २४ फरवरी से १००८ श्री शांतिनाथ भगवान के
पंच्कल्यांक एवं गजरथ महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है ....जिसमे आप सभी
सपरिवार,...
2 weeks ago
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उम्मीद है ‘लंका’ का बजेगा डंका
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मेरे लिए सबसे सुखद समय तब होता है, जब मैं यह कहता हूं कि फिल्म के ऊपर हममें
से किसी का बस नहीं चलेगा। अब ये दर्शकों के पास जा रही है। क्योंकि जितना काम
करन...
3 months ago
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ग़रीबी रेखा के ठीक ऊपर
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On the Way to Daarjiling - Raghu Rai
वे कौन लोग होते हैं
जो किसी अपरिचित की शवयात्रा में
चलते हैं हुजूम के साथ
उदासी चेहरों पर लादे
कौन होते हैं वे
आध...
5 months ago
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आज के पुष्प की अभिलाषा
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माखन लाल चतुर्वेदी की प्रसिद्द रचना पुष्प की अभिलाषा कों आज के सन्दर्भ में
एक स्थान पर कुछ ऐसे लिखा पाया
चाह नही मैं मनमोहन की माला में गुथा जाऊ
चाह नहीं ...
8 months ago
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जिंदगी जिधर ले जाए...
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ये जिंदगी किसे बहाकर कहाँ ले जाय , ये कोई नहीं जानता है.
इसी तरह दौड़ती भागती दुनिया में तमाम तरह की चीजों से टकराते हुए मैं आखिर
देश की राजधानी में अप...
1 year ago
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गलकटिया " मन "
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हम आशा करते हैं कि
वे बदलें
देखते - देखते
पूरी कि पूरी
दुनिया ही बदल जाती है
ऋतुएं ,
काया - माया ,
सारा का सारा भूगोल , गणित
और हमारा
गलकटिया " मन "
वैसा का ...
14 hours ago
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मुसद्दी की तलाश…
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"किन्हीं सन्दर्भों में मुत्सद्दी को क्लर्क से कम हैसियत का कर्मचारी बताया
गया है । दरअसल मुत्सद्दी का यह पतन कम्पनी राज के दौरान हुआ होगा ।."
*
ए क ...
3 days ago
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..आखिर क्यों शुक्रवार को फिल्में ही रिलीज़ नहीं होतीं, प्रसव भी ज्यादा होते हैं?
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एक प्रसूति विज्ञान के माहिर का सुनाया हुआ यह मज़ाक खासा वजनी है मायने रखता
है कि दुनिया भर में सबसे ज्यादा शल्य द्वारा प्रसव C-sections के मामले
शुक्रवार ...
3 days ago
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दुर्योधन की डायरी - पेज २९९३
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फिर से बहस शुरू हो गई कि क्या क्रिकेट की वजह से हॉकी और बाकी के खेलों की
दुर्गति हो रही है? हर एक-दो साल पर ऐसी बहस छेड़ी जाती है ताकि हमारी बहस
प्रधान संस...
1 week ago
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चुनाव बाद फिर फूटेगा महंगाई बम !
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देश में सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और चार दूसरे राज्यों में चुनावी मौहाल
के बीच ज्यादातर आर्थिक या फिर लोगों की जेब से ताल्लुक रखने वाले मसलों पर
अच्छी ख...
1 week ago
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विश्व रेडियो दिवस पर विशेष
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आज यानि 13 फरवरी 2012 को युनेस्को द्वारा पहली बार विश्व रेडियो दिवस मनाया
जा रहा है। रेडियो से हमारी भी ढेर सारी पुरानी यादें जुड़ी है, लीजिये पेश
है, मेरी...
3 weeks ago
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स्मृति
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पहचाना? शांति ने पूछा।
शांति साफ़ देख पा रही थी कि शब्बो देर तक उस मुस्कराते चेहरे से मिलती-जुलती
कोई शकल अपनी स्मृतियों की गठरी में टटोलती रही। कुछ बहुत...
5 weeks ago
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हम जनसत्ता में आपका लिखा अब भी पढ़ते हैं सर
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दिसंबर की कड़कड़ाती ठंड। रोज की तरह ही गहरे डिप्रेशन से उबरने के लिए किसी
और नए तरीके की खोज। क्या किया जाए? आज फिर बाजार चलते हैं और अबकी बार साबुत
हल्दी ...
5 weeks ago
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दूसरे ग्रहों पर जीवन, उन पर बसेरा – कल्पना आर्थर सी क्लार्क की
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इस चिट्ठी में, 'डिसकवरी साइंस' (Discovery Science) चैनल पर आ रही 'प्रॉफेटस्
ऑफ साइंस फिक्शन' (Prophets of Science Fiction) श्रृंखला की आर्थर सी क्लार्क
की ...
1 month ago
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अलविदा ब्लाग तीसरा खंबा ...
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इस माह के प्रारंभ में भारतीय न्याय प्रणाली के क्षेत्र में एक अधिवक्ता के
रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान करते हुए मुझे 33 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। जब मैं
ने इस क...
2 months ago
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सुरेश कलमाड़ी-अन्ना हज़ारे वार्तालाप !
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अन्ना हज़ारे की गिरफ़्तारी के बाद दिन भर सूचनाओं का सैलाब उमड़ता रहा. टीवी
चैनल,फ़ेसबुक,ट्विटर,सभी ओर से अलग अलग बातें आम आदमी तक पहुँचतीं रहीं.ये ख़बर
भी आई ...
6 months ago