skip to main |
skip to sidebar
-
-
लाइव आर्ट जैसे शहर में वान गॉग का बिंब
-
लाइव आर्ट जैसे शहर में वान गॉग का बिंब
-शिवप्रसाद जोशी आम्सटर्डम. नीदरलैंड्स की राजधानी . रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते हुए सबसे पहले जो चीज़ें दिखाईदेती हैं ...
15 hours ago
-
एक समय जो गुजर जाने को है
-
एक बार फिर- तीन कविताओं के साथ प्रस्तुत. शायद जल्द नियमित हो जाऊँ इस उम्मीद
के साथ. एक नये उपक्रम को अंजाम देने की चाहत में कुछ पुरानी नियमित दिनचर्या
से...
21 hours ago
-
सबद सहचर : १ : अजित वडनेरकर
-
*[ साहित्य और विचार को लेकर बहुत सारा काम सीधे इस माध्यम में हो रहा है। सबद
उन सब से अपना स्वाभाविक जुड़ाव महसूस करता है और उनका सहचर बनने का आकांक्षी
भी ...
5 days ago
-
सदी का सर्वश्रेष्ठ हिदी ब्लॉगर सम्मान
-
अगले कुछ सालों में ही हिन्दी ब्लॉगिंग सौ साल पूरे करने वाली है। इस मौके पर
सोचता हूं कि सदी के सर्वश्रेष्ठ हिदी ब्लॉगर का इनाम बांट दूं। कुछ दोस्तों
ने सुझ...
1 week ago
-
मनोहर पोथी बेचते बच्चे (कविता)
-
*हाल की एक कविता जिसके कुछ भाव आजादी कविता से मिलते हैं... *
दस रुपये में चार किताबें
बेच रहे थे बच्चे
उस दिन
रेलगाड़ी में
जिनकी उम्र दस साल भी नहीं थी।
...
2 weeks ago
-
डेढ़ महीने पहले का एक आलेख
-
आज हिंदू में यह खबर प्रामाणिक रूप से छपी है कि ज़ाकिया जाफरी मामले में
उच्चतम अदालत द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने यह कहा है कि नरेंद्र मोदी पर
2002 के द...
3 weeks ago
-
नहीं मंजिलों में है दिलकशी, मुझे फिर सफर की तलाश है...
-
नहीं मंजिलों में है दिलकशी...न, बिलकुल नहीं ! मोबाइल के उस पार दूर गाँव
से माँ की हिचकियों में लिपटे आँसू भी कहाँ इस दिलकशी को कोई मोड दे पाते हैं|
क्यों...
1 month ago
-
नोटबुक !!
-
- दिसंबर की उस सर्द रात बिस्तर पर उसके बाजू में लेटा उसका नन्हा अचानक
उससे पूछता है "ऊपर भगवान् जी के पास डार्क ग्रे रजाई है पापा ! "
वो किसी क...
2 months ago
-
कहानी के इस भाग के प्रायोजक कौन है ?
-
मैं कहानी में पूरी तरह से डूबा हुआ था.. या यू कह लीजिये कि मुझे तैरना आता
ही नहीं था.. एक छोटे से लकड़ी के तख्ते से लटका हुआ मैं आधा डूबा और आधा बचा
हुआ स...
6 months ago
-
रुकी हुई रेल
-
*हिलते पर्दे से छनकर रौशनी आती है , शीशे के बोल में अरालिया की एक लतर , किताबों
की टांड में एक ग्रॉसमन , रिल्के की ना समझी कोई कविता की एक अदद पंक्ति, चाय ...
8 months ago
-
अनिकेत - निकेतन
-
रोक लिया अपने अश्रु की धार को;
अनुभव किया जब नियति के प्रहार को,
एक सी करुणा थी उनकी आँखों में,
एक सा था भाव उनके चेहरे पर,
मातृ - पितृ विहीन है जीवन जिनका;
...
8 months ago
-
अपनी इच्छाओं की महक जिंदा रखा करो जान
-
-> रेलवे ट्रैक को चीरकर धड़धडाती हुई जाती रेलें. रिमझिम रिमझिम होती बारिश.
और छतरीनुमा प्लेटफोर्म की बैंच पर बैठा मैं. कितना हल्का, कितनी राहत. देखा
जाए तो...
8 months ago
-
AchchiKhabar.Com अब है AchhiKhabar.Com
-
The beginning of
*AchhiKhabar.Com*
AchchiKhabar.Com पर अपना कीमती वक़्त देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद् . आपके
सहयोग से यह हिंदी भाषा में लिखे जाने Blo...
9 months ago
-
दुनिया को बनाने वाला कोई भगवान नहीं...... स्टीफन हॉकिंग
-
स्टीफन हॉकिंग
लंदन........ दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में गिने जाने वाले स्टीफन
हॉकिंग ने कहा है कि इस दुनिया को बनाने वाला कोई भगवान नहीं है। यह द...
1 year ago
-
शादी करोगे तो पता चलेगा... हुंह!!
-
[image: Sister, Brother & Me]Image by El_Sol via Flickr
*तीन साल बाद वो भूल जाती थीं... अब हम जब क्लास ६ में थे तो वो ९ में थीं, अब
भला हम उनके क्लास में तो...
2 years ago
-
एक व्यंग्य :हरहुआ और टी० वी०
-
हरहुआ और टी०वी० किसी गाँव में, एक ज़मींदार साहब रहते थे।काफी लम्बी-चौड़ी ज़मींदारी थी।परन्तु जब से ज़मींदारी उन्मूलन अभियान शुरु हुआ तो उनकी ज़मींदारी ख़त्म हो गई...
2 years ago
-
.
-
अब ज़रा संघ के आइने में देखिए वामपंथी संकीर्णता का अक्स!
-
*(पिछले डेढ़ महीने से आवाजाही पर जो बहस चल रही थी, उसमें वाम दायरे के बाहर
से पहला संगठित और सक्रिय हस्तक्षेप आया है। मंगलेश डबराल जिस संस्थान के
मंच पर ...
16 hours ago
-
हिंदी स्पीच टू टैक्स्ट प्रोग्राम श्रुतलेखन - राजभाषा का नया संस्करण जारी - आउटपुट यूनिकोड हिंदी में, 90 प्रतिशत शुद्धता के साथ.
-
[image: image]
हिंदी के एकमात्र व्यावसायिक और व्यावहारिक रूप से सफल स्पीच टू टैक्स्ट
प्रोग्राम (हिंदी वार्ता से पाठ अनुप्रयोग) श्रुतलेखन - राजभाषा के बा...
21 hours ago
-
स्मृतिशेष भगवत रावत
-
दुनिया का सबसे कठिन काम है जीना
और उससे भी कठिन उसे, शब्द के अर्थ की तरह
रच कर दिखा पाना।
-भगवत रावत
जीवन को शब्द के अर्थ की तरह रच कर दिखाने वाले, हम स...
4 days ago
-
अनगढ़ कविता के, तलघर में..
-
*मैं एक कविता बनाने बैठता, और जल्दी ही ज़ाहिर होने लगता कि छिटकती बनती हुई
जो भी वह है, वह तो कतई नहीं जिसे पा लेने की पुलक में मैं उमगता कल्पना की
रेल चढ...
5 days ago
-
पति की आँखों में आँसू .....................घुघूती बासूती
-
उसने पति की आँखों में आँसू कभी न देखे थे। पति ही क्या अपनी भी आँखों में
नहीं देखे थे, बच्चों की आँखों में भी बहुत ही कम। ऐसा कहा जा सकता है कि अपने
परिवार...
6 days ago
-
-
Why GetResponse is right for you?
-
A Google Search for ‘Email Marketing Service’ brings about 770 million
results. An email marketer can name at least half-dozen different ESPs.
Then why y...
3 weeks ago
-
मरे दिलों में जज़्बातों की तलाश-हिन्दी शायरी
-
अपनी आँखों से जो देखा है वह सच किसी को न बताना, अपने कानों से जो सुना नहीं
वह स्वर किसी को समझाना, अपने दिमाग में भले ही पालो सपने वह किसी के सामने न
सजाना...
5 weeks ago
-
सत्य साई बाबा की असली विरासत (प्रथम महासमाधि दिवस 24 अप्रैल)
-
पिछले बरस २४ अप्रैल को श्री सत्य साई बाबा की महासमाधि के वक़्त देश के
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने पुट्टपर्ती स्थित आश्रम के माल-असबाब के बारे में
लगातार जानकार...
5 weeks ago
-
अदम जी मुझे लौकी नाथ कहते थे
-
जयपुर में अदम जी मंच संचालन कर रहे थे। मुझे कविता पढ़ने बुलाने के पहले एक
किस्सा सुनाया। किसी नगर में एक बड़े ज्ञानी महात्मा थे। उनका एक शिष्य था नाम
था...
5 months ago
-
-
दैने बाले सिरी भगवान और इन्तलनेछनल फकील
-
हफ़्ते के एक नियत दिन खताड़ी और उसके आसपास के मोहल्लों में भीख मांगने आने
वाला एक बूढ़ा इतनी ज़्यादा दफ़े अपनी बेहद सड़ियल और भर्राई हुई आवाज़ में
दैने बाल...
1 year ago
-
लिखना जरूरी क्यों है?
-
जब से ब्लॉगिंग से अल्पविराम(?) लिया है तब से कई मित्रों, पाठकों, शुभचिंतकों
ने कई तरीकों से उलाहना दिया है कि मैं लिखता क्यों नहीं। बीच में ऐसे ही कुछ
उलाह...
1 year ago
.
-
कोडनेम सी.के.डी.
-
कोई नहीं जानता कि उसका असली नाम क्या था. सब उसे सीकेडी बुलाते थे. बेहद
खूबसूरत लड़का. शफ्फाक गोरा. इतना खूबसूरत कि लड़कियों को जलन होने लगे. लंबा
ऊँचा कद.....
2 hours ago
-
हाय राम, कैसे होगा ब्लॉगिंग का उत्थान...खुशदीप
-
आजकल ब्लॉगिंग में दूसरों को उपदेश देने वालों की बाढ़ सी आ गई है...कोई
मर्यादा का पाठ पढ़ा रहा है...कोई टिप्पणी विनिमय का शिष्टाचार सिखा रहा
है.....
3 days ago
-
Real Beauty – वास्तविक सौंदर्य
-
हर सुबह घर से निकलने के पहले सुकरात आईने के सामने खड़े होकर खुद को कुछ देर
तक तल्लीनता से निहारते थे. एक दिन उनके एक शिष्य ने उन्हें ऐसा करते देखा.
आईने मे...
5 days ago
-
परिवार वही बेहतर हैं जहाँ आपस में प्रेम , विश्वास और अपनापन है , संयुक्त परिवार हो या एकल !
-
समाजशास्त्र की किताबों में पढ़ा था कि मनुष्य एक सामाजिक पशु है . पशु
समूह में रहना पसंद करते हैं , मनुष्य के लिए भी विभिन्न कारणों से अकेले
रहना संभव ...
1 week ago
-
मुर्गी भी माँ है !
-
सड़क..
कसाई की दुकान
पिंजरे में मुर्गे
चाकू से डरते!
ग्राहक की आमद,
मुर्ग़ों की शामत..
जान सबको प्यारी है,
कोने में छुपने की जंग
बाक़ायदा ज़ारी है!
आवाज़ आ...
2 weeks ago
-
एक ग़ज़ल : सोचता हूँ.....
-
सोचता हूँ इस शहर में आदमी रहता किधर है ?
बस मुखौटे ही मुखौटे जिस तरफ़ जाती नज़र है
दिल की धड़कन मर गई है अब मशीनी धड़कनों में
आंख में पानी नहीं, बस बच ग...
3 weeks ago
-
वीर सांघवी और तिग्मांशु से मुलाकात के बीच
-
सोमवार शाम को काम से फुर्सत पाने के बाद हिन्दुस्तान टाइम्स के ब्रंच मैग्जीन
द्वारा आयोजित एक समारोह में शामिल होने का अवसर मिला। यहां मेरी अगली फिल्म
‘शूट ...
2 months ago
-
अनंत
-
अनंत एक अंक नहीं बल्कि एक प्रक्रिया है... एक सोच है... वो जो हर बड़े से बड़ा
हो... फिर कैसे परिभाषित करें इसे? कई बातें शायद मानव सोच के बाहर होती
हैं... ए...
3 months ago
-
ग़रीबी रेखा के ठीक ऊपर
-
On the Way to Daarjiling - Raghu Rai
वे कौन लोग होते हैं
जो किसी अपरिचित की शवयात्रा में
चलते हैं हुजूम के साथ
उदासी चेहरों पर लादे
कौन होते हैं वे
आध...
7 months ago
-
आज के पुष्प की अभिलाषा
-
माखन लाल चतुर्वेदी की प्रसिद्द रचना पुष्प की अभिलाषा कों आज के सन्दर्भ में
एक स्थान पर कुछ ऐसे लिखा पाया
चाह नही मैं मनमोहन की माला में गुथा जाऊ
चाह नहीं ...
10 months ago
-
जिंदगी जिधर ले जाए...
-
ये जिंदगी किसे बहाकर कहाँ ले जाय , ये कोई नहीं जानता है.
इसी तरह दौड़ती भागती दुनिया में तमाम तरह की चीजों से टकराते हुए मैं आखिर
देश की राजधानी में अप...
2 years ago
.
-
अदब के लठैत
-
*
*
"एक विशेष माहौल और परिवेश में मेरा जन्म हुआ और परवरिश हुई। यह लोग मुझसे ऐसी
आशा क्यों करते हैं कि मैं उस जीवन का चित्रण करूँ जिससे मैं परिचित नहीं? गा...
13 hours ago
-
एक ट्विटर टाइम-लाइन
-
जिस तरह से आजकल सारे संवाद ट्विटर पर हो जाते हैं उसे देखते हुए आज सुबह सोच
रहा था कि अगर ममता दी ट्विटर पर होतीं तो कल शाम को उनकी ट्विटर टाइम-लाइन
कैसी द...
17 hours ago
-
जिम में घंटों बिताने के बनिस्बत तीन मिनट की गहन तीव्रता वाली कसरत काफी है ?
-
जिम में घंटों व्यायाम करते रहने वर्क आउट्स में समय बिताने से बेहतर क्या
आज की तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी के अनुरूप सिर्फ तीन मिनिट का ज़ोरदार (व्यक्ति
विशेष की ...
2 days ago
-
कमाल तकियाकलाम का
-
[image: speech]पिछली कड़ी- तकिये की ताकत
अ ब आते हैं *तकियाक़लाम* पर । तकियाक़लाम एक ऐसा अनावश्यक शब्दयुग्म या पद
होता है जिसे बोलने की आदत कई लोगों में हो...
2 days ago
-
हम संबंध बनाते हैं, चैनल के पैकेज नहीं डियर, सो प्लीजssssssss
-
*विनीत में अगर आकार की मात्रा लगी होती तो मैं उससे शादी कर लेता. खाने-पीने
की तकलीफ के नाम पर जो लौंडे घर में अपनी शादी की बात करते हैं, वो मेरी तारीफ
में ...
1 week ago
-
सत्य साई बाबा की असली विरासत (प्रथम महासमाधि दिवस 24 अप्रैल)
-
पिछले बरस २४ अप्रैल को श्री सत्य साई बाबा की महासमाधि के वक़्त देश के
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने पुट्टपर्ती स्थित आश्रम के माल-असबाब के बारे में
लगातार जानकार...
5 weeks ago
-
आप पक्के कानपुरिया है यदि ….
-
आप हर दूसरे वाक्य में चू*या शब्द का प्रयोग करते हैं। आप शॉपिंग माल में
चुपचाप पैसे देकर आ जाते हैं, लेकिन रिक्शे वाले से अठन्नी के लिए झगड़ा करते
हैं। आ...
5 weeks ago
-
नइकी दुलहिनिया!
-
नइकी, पहिले दिन ही आई तो, उसे पता था कि वो, सिर्फ दुबेजी का वंश चलाने के
लिए लाई गई है। उस पर हर समय बड़कई के गुस्साने का भी डर था। देखने में बड़कई
भी ठीक ...
1 month ago
-
सुगन्धित मूर्ख हैं आप..पांच साल बाद एक पुरानी पोस्ट
-
यह पोस्ट पांच साल पहले निर्मल आनंद पर यहां छपी थी.
मैं बाबा नागार्जुन से कभी नहीं मिला पर अनामदास मिले हैं.. मंत्र कविता की
प्रतिक्रिया में उन्होने लिखा.....
1 month ago
-
यदि यह आनन्द नहीं तब और क्या
-
इस चिट्ठी में कर्ट फोनेगेट के एक उद्धरण, ज़ेन पेन्सिल चिट्ठे, और और मेरे
प्रिय समय की चर्चा है। This post is about Kurt Vonegut, Zen pencil blog and
nice t...
1 month ago
-
-
गलकटिया " मन "
-
हम आशा करते हैं कि
वे बदलें
देखते - देखते
पूरी कि पूरी
दुनिया ही बदल जाती है
ऋतुएं ,
काया - माया ,
सारा का सारा भूगोल , गणित
और हमारा
गलकटिया " मन "
वैसा का ...
2 months ago
-
अलविदा ब्लाग तीसरा खंबा ...
-
इस माह के प्रारंभ में भारतीय न्याय प्रणाली के क्षेत्र में एक अधिवक्ता के
रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान करते हुए मुझे 33 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। जब मैं
ने इस क...
4 months ago
-