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रफ़ी साहब की आवाज़ में दो अंग्रेज़ी गाने दोबारा से
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हालांकि मोहम्मद रफ़ी साहब की आवाज़ में अंग्रेज़ी में गाए ये दो गीत कबाड़ख़ाने में अर्सा पहले भी लगाए जा चुके हैं पर दोबारा लगा देने में क्या हर्ज़ है ख़ासतौर पर यह ...
1 hour ago
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मायूस होना अच्छा लगता है क्या?
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अक्सर ही मैं खोजने लग जाता हूँ *अपने भीतर अपने आप को.* मैं वो नहीं जो इस
जमाने में जीने की जद्दोजहद में वक्त के थपेड़े खाता आज सबके सामने आता हूँ. मैं
कभी...
1 day ago
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डर जाने का डर
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ऊंचे आसमानों,
उड़ान पर निकले पंछियों,
निहत्थे मछुआरों,
अपने अंतहीन आर-पार
और
खामोश तटों को
लहरें आंखें तरेरती हैं,
खारे पानी के बोझ से लदे-फदे
इस समुद्र के
...
1 day ago
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शेक्सपियर ऐंड कम्पनी
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इस जगह को देख कर सबसे पहले इच्छा होती है कुछ दिन यहाँ रहा जाय । सचमुच रहा जा
सकता है अगर आप लेखक हैं और दुकान की मालकिन सिल्विया को आपकी शकल और आपकी
लिखाई ...
1 day ago
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सितारे डूबते सूरज से क्या सामान लेते हैं
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सोचा, बहुत दिन हो गये आपलोगों को अपनी ग़ज़ल से बोर किये हुये। तो आज एक ग़ज़ल-
एकदम नयी ताजी। जमीन अता़ की है फ़िराक़ गोरखपुरी साब ने...."बहुत पहले से उन
क़दमों क...
2 days ago
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संभव है तुम्हें ये निरर्थक लगे
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संभव है तुम्हें यह निरर्थक लगे
कि
शाम होते ही लौट आते हैं
अँधेरे काले खौफनाक साये
और तुम होते हो
अपने घरों में बेपरवाह
ये सोचते हुए
कि हम सुरक्षित हैं ...
4 days ago
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तुम सुन्दर, सुंदरतम हो
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हाँ सुन्दर हो, तुम सुन्दर सुन्दरतम रूप तुम्हारा पर प्यार बिना सुन्दरता क्या
प्यार से निखरे जग सारा… देखो सुन्दर धरती को पहन हरीतिमा इठलाती जीवन में
सुन्दरत...
4 days ago
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वहीं रख आया मन
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उन्हीं इलाकों से वापस मुड़ना है
वहीं से गुजरते हुए
देखना है वही पेड़, वही गुफाएँ
* *
आँखें बूढ़ी हुईं
पेट बूढ़ा हुआ
रह गया अभागा मन
तलाशता वहीं जीवन
* *
...
1 week ago
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बा'रा'त निकली है... तो दूर तलक जायेगी...
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जिसने लाईफ में बारात अटैंड नहीं की है उसने कही बैठकर झक ही मारा है.. बारातो में झूमकर ठुमके लगाने का अपना ही एक अलग मज़ा है.. यु तो हर बारात में ही कुछ ना कु...
1 week ago
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हमारी समझ और हमारी सोचने की ताक़त और क्षमता हमारी धारणा बनाती है
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*मैं यहाँ कुछ बातें लिख रहा हूँ, कृपया इसे शिक्षा न समझें - और ये बस यूं ही
कही जा रही है.. इसमें से जो लगे की आपके काम का है, ले लो.. बाकी समझो कि लिखा
ह...
1 week ago
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सबद पुस्तिका : २ : कुंवर नारायण
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***( कुंवरजी का यह ताज़ा लेख पहलेपहल **सबद पुस्तिका **के रूप में यहाँ छप रहा
है, यही बहुत खुशी की बात है। ८२ की उम्र में भी उनकी मेधा, चिंतन-प्रक्रिया और
कव...
1 week ago
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चिट्ठाचर्चा –यादों का एक सफ़र
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चिट्ठाचर्चा के चर्चाकार ऊपर से नीचे बायें से दायें पहली पंक्ति जीतेन्द्र
चौधरी, समीरलाल,आलोक कुमार ,सृजन शिल्पी,रविरतलामी, विपुल जैन, तुषार जोशी, अभय
तिव...
2 weeks ago
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"फकत खामख्याली का कन्साइनमेंट "
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औसत आदमी के लिए यह सोच लेने से बड़ा ढाढस ओर कुछ नहीं है के सचाई की हमेशा जीत होती है -कर्टसी नैतिक शिक्षा ....यारो ने कहा है के लोभ भी एक कंटाजीयस बी...
2 weeks ago
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महर्षि वाल्मीकि
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Powered by Max Banner Ads महर्षि बनने के पहले वाल्मीकि रत्नाकर के नाम से
जाने जाते थे। वे एक दस्यु थे। दस्युकर्म के मध्य एक बार उन्होंने देखा कि एक
बहेलिय...
4 weeks ago
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बेसुध की सुधि लेवे कौन?
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*
*
*कंकरीली - पथरीली राह पर;*
*एक बटोही चलते - चलते थक गया,*
*जो कुछ उसके पास था वह लुट गया,*
*समय की तपिश में सब झुलस गया.*
*नियति के प्रहार से हो क्षत - व...
4 weeks ago
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एक व्यंग्य: अनावरण एक(गांधी) मूर्ति का...
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नेता जी ने अपनी गांधी-टोपी सीधी की।रह रह कर टेढी़ हो जाया करती है। विशेषत: जब वह सत्ता सुख से वंचित रहते हैं।धकियाये जाने के बाद टेढी़ ,मैली-कुचैली हो जाती ह...
1 month ago
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विंडोज 7 में हिन्दी में काम कैसे करें?
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ठीक है, हर तरफ विंडोज 7 की चर्चा है, यह विक्रय के नए कीर्तिमान चहुँओर
स्थापित कर रहा है, और आपके नए नवेले कम्प्यूटर पर भी विंडोज 7 आया हुआ है.
सवाल ये है क...
3 hours ago
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श्लील और अश्लील
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श्लील और अश्लीलश्लील और अश्लील का रोना रोते ये लोगजिनके देश में तन ढकने को बहुतों के पास कपड़ा नहीं हैजहाँ बहुतों का पेट कहाँ खत्म होता है और पीठ कहाँ शुरूयह ...
20 hours ago
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कविता के सूनसान, मैदान, में..
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सुनती हो सुन रही हो, कविता? रिक्शे का कोना लिये, गोद में दोना, बात-बात पर
मुँह फुलाती, वस्त्र यही पहनूंगी और भाषा मेरी बेस्ट फ्रेंड है उससे प्रॉपरली
बिहेव ...
1 day ago
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खौफ की सुरंग
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मेट्रो ट्रेन फिर ठप हो गयी। राजीव चौक के पास फंस गयी। सुरंग में फंसकर यात्री
परेशान हो गये। 1- इस खाकसार का सुझाव है कि मेट्रो वालो को ट्रेन यात्रा के
साथ ...
2 days ago
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चेहरा बदल जाता है, चाल नहीं-व्यंग्य कविता (Face turns, not tricks –
satirical hindi poem)
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इंसान के चेहरे बदल जाते हैं नहीं बदलती चाल। खून खराबा करने वाले हाथ बदल जाते
हैं वही रहती तलवार और ढाल। इंसान से ही उगे इंसान संभालते उसका खानदान जमाने
को ...
2 days ago
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डॉ. अंबेडकर नहीं पढ़ पाए थे जो भाषण, क्या वही है भारत की मुक्ति का मार्ग?
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*शेष नारायण सिंह *
*(क्या मायावती जाति के विनाश के ऐतिहासिक कार्यभार को पूरा करने का बीड़ा
उठाएंगी। पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार और समाजवाद के अध्येता शेष नारायण ...
3 days ago
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याद हैं तुम्हें ये चिड़ियाँ ?
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क्या कहा.... नहीं ? तो फ़िर देखो न शायद कुछ याद आ जाए !
6 days ago
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शिरीष मौर्य को लक्ष्मण प्रसाद मंडलोई सम्मान
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*पृथ्वी पर एक जगह को मिला सम्मान*
शिरीष कुमार मौर्य हिंदी कविता का एक युवा और सधा स्वर हैं। उनके कई संकलन
प्रकाशित हैं। १९९४ में कथ्यरूप ने पहला कदम नाम...
1 week ago
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बिना कुछ कहे...
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मैं बेफिक्र होकर सोया हुआ था
तेरे नर्म ख्वाबों में खोया हुआ था
खुदा जाने फ़िर क्या ज़रूरत हुई
बिना कुछ कहे तू जो रुखसत हुई
मुझे लग रहा था के लौट आएगी
इस ...
1 week ago
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उड़ गया....कागद कारे करने वाला हँस अकेला !
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आज सुबह आकाशवाणी समाचार में वरिष्ठ हिन्दी पत्रकार श्री प्रभाष जोशी के अवसान
का समाचार सुना. यूँ लगा जैसे मालवा का एक लोकगीत ख़ामोश हो गया. उनके लेखन में
मा...
2 weeks ago
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बकवास करो
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बकवास करो
हर बार करो - गर बिकता है।
हंसो, हंसो, तुम और हंसो
यदि इससे भी कुछ बनता है।
यह पैसा है वह जरिया, जिससे सब कुछ
कुछ भी मिल सकता है
लेकिन यह पैसा पाने ...
1 month ago
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बदलाव तो शतरंज का खेल है, शह और मात
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सामाजिक बदलाव, व्यवस्था परिवर्तन। सिस्टम बदलना होगा। बीस-पच्चीस साल पहले
नौजवानों में यह बातें खूब होती थीं। अब भी होती हैं, लेकिन कम होती हैं। कितनी
कम, न...
3 months ago
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कारगिल : तीन कवितायें, तीन किस्से
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1999 की बरसात के दिन थे।
युद्ध के काले बादल बरसकर छंट चुके थे। मगर चुनावी युद्ध के बादल जनता की
उम्मीदों पर बरस पडऩे को बेताब थे। चुनाव की रिपोर्टिंग के ...
3 months ago
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ज्याउल, उरस की मूफल्ली, मोर्रम और ब्रिच्छारौपड़ - ६
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लफ़त्तू और मैं हरिया हकले की छत फांद ही रहे थे जब पीछे से बन्टू की आवाज़ आई:
"रुको मैं भी आ रहा हूं यार." ज़ीना उतर कर हम दूधिये वाली संकरी गली में थे.
सरदारन...
3 months ago
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महबूबा ..महबूबा ..
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यदि इस पोस्ट का टाइटल पढ़कर आपको फिल्म शोले की याद आ जाये तो इसमें मेरा कोई
कसूर नहीं है, लेकिन मैं ना तो आज आपको फिल्म शोले का गाना सुना रहा और ना ही
अपन...
3 months ago
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अधिकांश ट्रैवल साइटें चोरी की सामग्री से चल रही हैं
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कल हम लोगों नें बच्चों की गरमियों को दौरान कुछ पर्यटन स्थलों को भ्रमण के
लिये इंटरनेट पर विभन्न ट्रैवल साइटों से उन स्थानों के बारे में जानकारी लेने
की क...
6 months ago
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Facebook अब भारतीय भाषाओँ में
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Facebook दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्क साईट. अभी भारत में भले ही ये Orkut
से पीछे हो पर Corporate और Professional जगत में इसकी धूम है. Facebook अब हाल
म...
6 months ago
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26/11 की याद कर दहल उठता है दिल
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ऐसा लगता है कि मैं कल ही मलेशिया से आया था। और ऐसा लगता है कि मैं अभी रात को
सोकर उठा हूं। हालांकि, बात पिछले साल 26 नवंबर की है, जब मुझे आधी रात के करीब
ढ...
4 hours ago
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हमारे सांसद, हमारे बच्चे...खुशदीप
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देश की हक़ीक़त से आज अपनी इस माइक्रो पोस्ट में रू-ब-रू कराता हूं...
*हमारे सांसद-*
लोकसभा में करोड़पति सांसदों की संख्या दोगुनी हो गई है...वर्ष 2004 में लो...
13 hours ago
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बंद भी खुला भी !
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टोपोलोजी की बात शुरू होने के पहले बंद हो गयी. बात प्रस्तावना से आगे बढ़ी ही
नहीं. 'शुरू होने से पहले ही बंद...? !' अब बात थी टोपोलोजी की तो ऐसा ही होना
था...
1 day ago
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अजब प्रेम की गजब कहानी
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मेरे पडोस मे एक बुजुर्ग है अच्छी नौकरी से रिटायर हुए है मकान जमीन सम्पत्ति
सभी कुछ है सरकार पूर्वजन्मो के अपने पापो का प्रायश्चित करने हेतु इन्हे
पेन्शन...
1 day ago
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डर जाने का डर
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ऊंचे आसमानों,
उड़ान पर निकले पंछियों,
निहत्थे मछुआरों,
अपने अंतहीन आर-पार
और
खामोश तटों को
लहरें आंखें तरेरती हैं,
खारे पानी के बोझ से लदे-फदे
इस समुद्र के
...
1 day ago
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प्राणीमात्र के लिए दया
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डॉ. अल्बर्ट श्वाइट्ज़र (1875 -1965 ) फ्रांसीसी-जर्मन चिकित्सक, दार्शनिक, और
संगीतकार थे. उन्होंने अपना लगभग सारा जीवन मध्य अफ्रीका के बेहद अभावग्रस्त
क्षेत...
2 days ago
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तुम याद आए ...बहुत याद आए
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तुम्हारा हाथ हाथ में लिए
नहर के किनारे
सरसों के खेतों की पगडंडियों पर
गुनगुनी धूप में
देर तक चलते
दूर जाती ट्रेन की आवाज से पलटते
आबादी से दूर पाकर ख़ुद को...
2 days ago
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चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में-23
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बहुत नाईंसाफी है ये तो...बहुत नाईंसाफी है... पूरा एक हफ्ता मिला था आप सभी को
पहेली का हल ढूँढने के लिए...लेकिन ये क्या?....कोई भी इस बार पूर्ण विजेता
नही...
2 days ago
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आउट ऑफ़ बॉडी एक्सपीरिएंस
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रात के किसी अनगिने पहरतुम्हारी साँसों की लय को सुनते हुएअचानक से ख्याल आता हैकि सारी घर गृहस्थी छोड़ कर चल दूँ...शब्द, ताल, चित्र, गंधतुम्हारे हाथों का स्पर्श...
4 days ago
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दोस्त तुमको मेरी कसम
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दोस्ती होती नही भूल जाने के लिए
दोस्ती होती नही बिछर जाने के लिए
दोस्ती करके खुश रहोगे इतना
वक्त नही मिलेगा आशु बहाने के लिए
जिन्दगी मैं कई रिश्ते हे जिनको...
6 days ago
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दूसरा प्यार
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दूसरे प्यार में नहीं लिखी जाती
पहली अर्थहीन प्रेम-कविता
पहला थरथराता चुंबन
नहीं लेता कोई दूसरे प्यार में
दूसरे प्यार के बारे में
नहीं लिखता कोई अभिज्ञान
और न...
1 week ago
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आपकी नींद और सुख के बीच
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यह बहुत पहले की बात नहीं है कि इसे सुनाते हुए भी मैं यह उम्मीद आपको बराबर
बँधा सकूं कि ऐसा किसी और ज़माने, किसी और दौर में हुआ था और अब हमें डरने की
ज़रूरत न...
2 weeks ago
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Curtain Down
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The 5 month old reality show air on MAHUA chanel, SUR-SANGRAM, came to an
end last night. The grand finale was organised here in the historic Gandhi
Maidan...
2 weeks ago
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सत्यकाम, भैंसे की सवारी और यमराज......
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मेरे नश्वर पाठक,
आज ठान कर बैठा हूँ कि इस पोस्ट में कुछ नहीं लिखूंगा अपने काम या काम की जगह
के बारे में.....
हाँ तो,....उत्तम प्रदेश के एक मंझोले शहर में ...
2 months ago
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जीवन की नई कड़ी, नया सफर
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*मीतेन्द्र नागेश*
ब्लॉगर बंधुओं व दोस्तों, इस पोस्ट में मुद्दा न राष्ट्रीय है और न
अंतरराष्ट्रीय। क्षेत्रीय भी नहीं है और न ही स्थानीय। मुद्दा है व्यक्तिगत।...
7 months ago
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पढ़े लिखे भी होते हैं अधविश्वास का शिकार?
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जी हाँ, सिर्फ जाहिल और गंवार ही नहीं पढ़े लिखे भी होते हैं अधविश्वास का शिकार। कैसे? तो यह बताने से पहले मैं अपने जीवन का एक अनुभव आप सबके साथ बांटना चाहूँग...
1 hour ago
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गति और स्थिरता
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[image: clock] गति में भय है । कई लोग बहुत ही असहज हो जाते हैं यदि जीवन में
घटनायें तेजी से घटने लगती हैं। हम लोग शायद यह नहीं समझ पाते कि हम कहाँ
पहुँचे...
8 hours ago
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बेअक्ल, बेवक़ूफ़, बावला, अहमक़!!!!
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[image: feldstein]
बुद्धिहीन व्यक्ति के लिए हिन्दी में कई तरह की व्यंजनाएं हैं। मूढ़, मूढ़मति,
मूर्ख, बुद्धू जैसे शब्दों के साथ ही अरबी-फारसी मूल के भी कई ...
10 hours ago
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वैदिक सभ्यता : भारत में विधि का इतिहास-2
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विकसित सिंधु सभ्यता के उपरांत प्राचीन भारतीय सभ्यता के प्रमाण के रूप में
आर्यजनों द्वारा रची गई ऋचाओं का संकलन चार वेद हमारे सामने हैं। ये काव्य
रचनाएँ, ह...
17 hours ago
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IBN7 पर हमला लोकतंत्र पर हमला नहीं है
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मूलतः प्रकाशित मोहल्लाLIVE
पोस्टर- साभारः मीडियाखबर डॉट कॉम
IBN7 और IBN7 लोकमत के मुंबई और पुणे दफ्तर में शिवसेना के गुर्गे ने जो कुछ भी
किया, वेब लेखन ...
2 days ago
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ऐसा चमत्कार कैसे हो जाता है
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हिंदी-अंग्रेजी का व्यवहार-बोलचाल हमें गजब का बदल रहा है। हिंदी के जिन
शब्दों, क्रिया कलापों को हम हिंदी में सुनना नहीं चाहते वही अंग्रेजी भाषा में
तब्दील ह...
2 days ago
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My Weekly Twitter Updates for 2009-11-22
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I always thought that (after Shivaji) Sachin was the holy-cow for
Maharashtrians. It only takes few goons to bring this sea-change? #
@sandygautam Indiblog...
2 days ago
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टेस्ट
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This is a trial post.
5 days ago
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निसर्ग ही मेरे लिए...
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वह
देखती है
चाँद को
चाँद
कहीं अधिक
रौशन हो जाता
रिक्त में रंग सजाता है
सफ़ेद अब
सफ़ेद नहीं रह पाता
उसकी उफ़ से
दामन में स्याह भर
आकाश को
गहराता है...
6 days ago
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बकबक सुनना, हुआ आसान
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इस चिट्ठी में बताया गया है कि नये फायरफॉक्स में ऑग मानक की ऑडियो फाइलों के
लिये समर्थन है और कैसे इन्हें सुना जा सकता है। is chitthi mein btaayaa gyaa
hai ...
1 week ago
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नन्हें मुन्हें बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है ?
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कल तक जिन गीतों को मेरे पिता गुनगुनाते थे उनके बाद उन गीतों को हमने भी गाया
गुनगुनाया .... अब हमारे बाद आने वाली पीढ़ी भी उन्हें गुनगुना और गा रही है,जब
...
1 week ago
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आपकी नींद और सुख के बीच
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यह बहुत पहले की बात नहीं है कि इसे सुनाते हुए भी मैं यह उम्मीद आपको बराबर
बँधा सकूं कि ऐसा किसी और ज़माने, किसी और दौर में हुआ था और अब हमें डरने की
ज़रूरत न...
2 weeks ago
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चिट्ठा चर्चा और मेरे अनुभव
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साथियों, आज चिट्ठा चर्चा अपनी 1000वी पोस्ट लिख रहा है, इस अवसर पर चिट्ठा
चर्चा की टीम को ढेर सारी बधाईयां एवं भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। जैसा
कि आपक...
2 weeks ago
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सर्वे भवन्तु सुखिनः
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दस नवम्बर १९८९ - आज से बीस साल पहले घटी इस घटना ने साम्यवाद, कम्युनिज्म, मर्क्सिज्म और तानाशाही आदि टूटे वादों की कब्र में आखिरी कील सी ठोक दी थी. जब जर्मनी ...
2 weeks ago
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वसुधैव कुटुम्बकम?
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दुनिया भर में फैले हुए प्रवासी भारतीय हिन्दुओं को यदि उन देशों के बहुसंख्यक
लोग गोमांस खाने पर मजबूर करने लगे तो उन्हे कैसा लगेगा। यदि वो अपनी मरजी से
ऐसा ...
2 weeks ago
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उड़ गया....कागद कारे करने वाला हँस अकेला !
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आज सुबह आकाशवाणी समाचार में वरिष्ठ हिन्दी पत्रकार श्री प्रभाष जोशी के अवसान
का समाचार सुना. यूँ लगा जैसे मालवा का एक लोकगीत ख़ामोश हो गया. उनके लेखन में
मा...
2 weeks ago
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आखिर ब्लॉगर हैं..हर स्थिति में अपना झंडा गडेगा ही.
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इलाहबाद में ब्लॉगर संगोष्ठी हो गई. जब संगोष्ठी का पता चला तो एक बार मन में
आया कि; 'अगर मुझे निमंत्रण न मिला तो एक 'सॉलिड पोस्ट' लिखने का बड़ा सॉलिड
बहाना ...
4 weeks ago
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असली -नकली नोट का चक्कर
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इतने समय से सुनते आ रहे थे की मार्केट मे नकली नोट चल रहे है पर पहली बार हमें
नकली नोट मिला और पहली बार ही नकली नोट देखा भी । :) तो सवाल ये की नकली नोट
भला ...
1 month ago