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क्या इसीलिए कहलाते हैं ये जनसेवक!
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अंतिम छोर के आदमी को दो सौ साल लगेंगे बुनियादी सुविधाएं मिलने में तीन दशक
पहले माल वाहक वाहनों पर ”लोक वाहक” लिखा होता था, इन अंधी रफ्तार से चलने वाले
ट्रक...
13 hours ago
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काफ़्का का ’द कासल’ - दसवां हिस्सा
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(पिछलीऒ किस्त से जारी) इस के तुरन्त बाद काउन्टर के पीछे घटने वाला सम्भोग दृश्य और ब्रिज इन में एक और दूसरा ऐसा ही दृश्य ही मात्र दो इरोटिक अनुभव हैं जिनका क...
19 hours ago
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राजनीति के तीन सफे, तीन दिन!
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राजनीति के ये नये सफे हैं, नए मुहावरे जो पिछले दो-तीन दिनों में कश्मीर से
गुजरात तक और दिल्ली से महाराष्ट्र तक चौंकाने वाले अंदाज में सामने आए हैं।
मसलन, क...
1 day ago
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आइ लव यू, फ्लाय-ब्वाय...!
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*तारीख: 27 जनवरी 10
जगह: जम्मु-नगरौटा में कहीं एक सैन्य हेलिपैड।*
दोपहर के *चार* बजने जा रहे हैं। दिन भर की जद्दो-जहद के बाद कुहासा चीरते हुये
आखिरकार सूर्...
2 days ago
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बिजली रानी, बड़ी सयानी
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अन्तर्राष्ट्रीय पत्रिका *“हिन्दी चेतना”* , हिन्दी प्रचारणी सभा कनाडा की
त्रेमासिक पत्रिका है. साहित्य जगत में अग्रणी स्थान रखने वाली इस पत्रिका के
संर...
2 days ago
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पिछली तारीख के आइनों का डीप फ्रीजर
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चिरकुट" दरअसल हमारे देश की एक नेशनल गाली का शिष्ट अनुवाद है ...हम इसके अविष्कारक को रोज मन ही मन सैल्यूट ठोक देते है ..कितना आसान है न गला फाड़ कर चिल्लाकर ...
4 days ago
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लोग ही चुनेंगे रंग
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शिल्पायन प्रकाशन से मेरा ताजा कविता संग्रह 'लोग ही चुनेंगे रंग' प्रकाशित हुआ
है। शनिवार को साढ़े चार बजे दिल्ली पुस्तक मेले में शिल्पायन के स्टाल (हाल
१२) ...
5 days ago
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बच्चों को खुश करें सू्र्य के प्रकाश को इन्द्रधनुषीय रंगों बदला दिखाकर और
उनका ज्ञान भी बढ़ायें
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आसमान में इन्द्रधनुष को देखकर बच्चे कितना आनन्दित होते हैं! अजी बच्चे तो
क्या आपको भी मजा आ जाता है। पर इन्द्रधनुष हमेशा थोड़े ही दिखता है? यह तो तभी
दिखता ...
5 days ago
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छोटी छोटी खुशी के वो पल दो पल
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[image: Joy of Happiness]Image by ~FreeBirD®~ via Flickr
*अब लाटरी चाहे चार डालर की लगे या चार रूपये की - पर मन तो खुश होता है ही*.
मेरे को भी याद है, कि ज...
6 days ago
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उन क़दमों के निशाँ !
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वो ठीक पहाड़ की चोटी पर था । जहाँ से वो उस दिशा में जाना चाहता था, जहाँ
पहुँचने पर उसे मंजिल मिल जाने का एहसास हो । नही यह ठीक नहीं । उसे सम्पूर्णता
का एहसा...
6 days ago
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व्योमेश शुक्ल की दो नई कविताएं
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*मैं हूँ और वे हैं*
* **इस* बीच कई बार बार धूप खिली. अचार के मर्तबान से गुप्ताजी के सिर तक तक
फैलकर उसने मनमाने चित्र बनाये. बहुत दिनों बाद देखकर खुश हो जा...
1 week ago
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फटा पोस्टर निकला हीरो..
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फटा पोस्टर निकला हीरो.. फिल्म हीरो हीरालाल का ये डायलोग आज भी हम तब इस्तेमाल
कर लेते है जब कोई धमाकेदार एंट्री लेता है... फिल्मो के कुछ डाय्लोग्स कालजयी
हो...
1 week ago
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…अथ कोलकता मिलन कथा
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पिछ्ले दिनों कोलकता जाना हुआ। हल्का सा अचानक। हल्का सा अचानक इसलिये जाने के
एक हफ़्ते पहले ही दो दिन की एक ट्रेनिंग के लिये हमें सिटी ऑफ़ जॉय जाने को कहा
गया...
1 week ago
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द माईलस्टोन ... भाग 2
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( अब आगे ... )
अगर किसी फिल्म की शूटिंग चल रही होती तो भीड़ होती और वह लौट जाती
चुपचाप...लेकिन उसकी नजरें अभी जंगल और नदी तट को छान रही थीं... कहीं ‘कोई’ तो...
1 week ago
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एक सूचना : उर्दू-से-हिंदी
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www.urdu-se-hindi.blogspot.com ब्लाग का मक्सद फ़कत इतना है कि उर्दू अदब में आजकल जो लिखा/पढ़ा जा रहा है या जो सरगर्मियाँ उधर हैं उन्हे अपने हिन्दीदाँ दो...
4 weeks ago
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मेरे अपनों के नाम...
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नववर्ष मंगलमय हो!
सूरज की सुनहरी किरणें और गुनगनी धूप,
प्रगति की शीतल बयार और झंझावातों से लड़ने की शक्ति,
सफलता से भरे दिन और नींद भरी शांत रातें,
सच...
5 weeks ago
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Madmimi: The simplest tool for Email Marketing
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Thinking about Email Marketing, But don’t have much resources? Then, Madmimi
is definitely for you. It’s simple and cost less than others. You can do
your ...
11 hours ago
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मयखाने में महंगाई
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एक अजब से ' पोस्चर' में मनोज कुमार अपने चेहरे पे हाथ रख लिया करते थेकभी-कभार ,
बस यही याद करके हँसते हैं लोग आज इस जीनिअस फिल्मकार पर । भूल गए हैं कमबख्त,कम...
11 hours ago
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50 मजेदार कम्प्यूटिंग कहावतें
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[image: image]
50. "कुछ चीजों का मतलब मनुष्य को कभी पता करने की जरूरत ही नहीं है. और बाकी
सबकुछ के लिए, अपने इधर तो गूगल है. "
49. असफलता "कोई विकल्प न...
20 hours ago
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आखिर कहां गायब हो जाते हैं दलित-आदिवासी अफसर
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*दिलीप मंडल*
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कुल 88 में एक भी नहीं। ये आंकड़ा है देश की शीर्ष नौकरशाही में दलित अफसरों की
मौजूदगी का। देश को चलाने वाली शीर्ष नौकरशाही यानी केंद्र स...
3 days ago
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दुश्मनी के सौदे-हिन्दी शायरी
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दौलत की रौशनी से अमीर, अपनी महफिलें सजाते हैं, गरीबों के दिल में लगे आग,
इसलिये चिराग जलाते हैं। मत बहको ऊंचे उनके ठाठ देखकर, हमेशा धोखा खाओगे,
बेचने वाली...
3 days ago
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बइयाँ ना मरोड़ो बलमा..............घुघूती बासूती
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अवैधानिक चेतावनी: ज्ञान पिपासु फिर कभी आएँ जब ज्ञान वार्ता हो रही हो। खेद है
कि आज ज्ञान की दुकान बन्द है। आज अगम्भीर चिन्तन दिवस है।
प्लास्टर उतर गया, जमक...
4 days ago
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क्या हिंदी एक मरती हुई भाषा है?
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करीब दो महीने हो गए। जानेमाने आर्थिक अखबार इकोनॉमिक टाइम्स के संपादकीय पेज
पर 19 नवंबर को टी के अरुण ने एक लेख लिखा था जिसका शीर्षक था - Hindi an
endangere...
6 days ago
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समय न मिले तब भी आना
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आजकल क्या लिख रहे हो?
इस सवाल के जवाब में 'एक उपन्यास पर काम चल रहा है' कई वर्षों से मेरे लिए
लिखने से बचने का एक खूबसूरत बहाना बना हुआ था। मित्रों ने घेराब...
1 week ago
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जब आप 'सच' बोलते हैं
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आप जब भी 'सच' बोलते हैं
मेरी उँगलियाँ थरथराने लगती हैं
भिंच जाती है मेरी मुट्ठी
आप भी, न जाने क्यों, मुझे दिखने लगते है
पगुराती भैंस
जब भी आप सच बोलते हैं।
न...
1 week ago
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बिखरे हुए.. जैसे बिखरी बोली..
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*सिर ओले पड़ेंगे*, उंगलियों पर घमौरियां उगेंगी, आवारा कोई बिल्ली आकर
बरौनियां चूम जायेगी, *प्रभुवर, ऐसे में गाल कौन ज़बान मचायेंगे?* मतलब भाषा
कौन राह, ...
1 week ago
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गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं ...
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गणतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत शुभकामनाएं। इधर काफी दिनों से कुछ लिख नहीं
पाया। नौकरी बदल रहा था, मसरूफियत ज्यादा थी। अब सब कुछ सामान्य है आप सबसे
मुलाक़ात ...
2 weeks ago
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अंधेरे का समाजवाद
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अंधेरा है, दूर तक अंधेरा है। ना जी, ये कोई कविता नहीं हो रही है। विशुद्ध
यथार्थवाद है। बिजली गायब रहे, तो कवि जागृत नहीं होता। कविता लिखने की न्यूनतम
जरुरत...
2 weeks ago
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अपने अश्क जी याद हैं आपको
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*लोग कितने भुलक्कड़ है*
उपेन्द्र नाथ अश्क जी को आप भूल गए। हाँ वही अश्क जी जो लगातार लिखते रहे।
हिंदी उर्दू के बीच पुल बने रहे। वही जो इलाहाबाद की धुरी थ...
3 weeks ago
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मन को पतंग बना लो
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उड़ती है वह बेख़बर
जैसा उड़ाने वाला चाहे
कितना समर्पण है उसमें
न कोई चाहना
न कोई शर्त
हवा के रूख़ को
हमसफ़र बना कर
उड़ती रहती है
वह अ...
3 weeks ago
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ज्याउल, उरस की मूफल्ली, मोर्रम और ब्रिच्छारौपड़ - ६
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लफ़त्तू और मैं हरिया हकले की छत फांद ही रहे थे जब पीछे से बन्टू की आवाज़ आई:
"रुको मैं भी आ रहा हूं यार." ज़ीना उतर कर हम दूधिये वाली संकरी गली में थे.
सरदारन...
6 months ago
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महबूबा ..महबूबा ..
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यदि इस पोस्ट का टाइटल पढ़कर आपको फिल्म शोले की याद आ जाये तो इसमें मेरा कोई
कसूर नहीं है, लेकिन मैं ना तो आज आपको फिल्म शोले का गाना सुना रहा और ना ही
अपन...
6 months ago
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अधिकांश ट्रैवल साइटें चोरी की सामग्री से चल रही हैं
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कल हम लोगों नें बच्चों की गरमियों को दौरान कुछ पर्यटन स्थलों को भ्रमण के
लिये इंटरनेट पर विभन्न ट्रैवल साइटों से उन स्थानों के बारे में जानकारी लेने
की क...
8 months ago
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मुझे क्षमा करना हे रघुराई .......!!
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राम प्रत्येक हिन्दू व्यक्ति के आराध्य हैं और अपने पारिवारिक संस्कारों के
चलते मैं भी अंधभक्ति की तरह उनकी पूजा अर्चना करती हूँ ....मगर हमेशा की तरह
दिल (जो...
4 hours ago
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शेर मारना कितना आसान...खुशदीप
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एक दिन मैंने आपको शेर सिंह (*ललित शर्मा*) जी के डैन में घुसकर वहां का आंखों
देखा हाल सुनाया था...अपने इन शेर सिंह जी की तो मूछें ही इतनी गज़ब हैं कि कोई
भी...
9 hours ago
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राजनीति के तीन सफे, तीन दिन!
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राजनीति के ये नये सफे हैं, नए मुहावरे जो पिछले दो-तीन दिनों में कश्मीर से
गुजरात तक और दिल्ली से महाराष्ट्र तक चौंकाने वाले अंदाज में सामने आए हैं।
मसलन, क...
1 day ago
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एक गीत : जिसने मुझे बनाया ..
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जिसने मुझे बनाया ,उसका ही गीत गाया
दरबारियों के आगे कभी सर नहीं झुकाया
मिट्टी सा भुरभुरा तन किसके लिए सजाया
यह कब रहा था अपना जो अब हुआ पराया
पानी के बुलबुल...
2 days ago
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घातक है संकीर्ण राजनीति का विष
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सपनों के शहर मुंबई में इससे पहले ऐसा वातावरण कभी नहीं था। एक अंजान सी
चेतावनी हमेशा कानों से टकराती रहती है। घर से बाहर न निकलो। घर में दुबककर
रहो। घर से ब...
4 days ago
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अरसा पहले
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हाँ वो भी एक दौर था, इश्क कापहला सीनदोस्त के कान में फुसफुसाते हुए, "पता है पता है, आज उसने मुझे मुड़ कर देखा"। उसके चेहरे पर ऐसा भाव आता है जैसे ये राज़ वो ...
5 days ago
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मैं और मिसेज खन्ना
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मैं और मिसेज खन्ना
अक्सर चाय पीते है
रोजाना शाम को
उस वक़्त भूल जाते है
हर किसी काम को
मौसम बदला वक़्त गुजरा
पर नहीं बदला हमारा चलन
युही चुसकिया लेते रहे हम...
6 days ago
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चोर बादशाह
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गज़नी के बादशाह का नियम था कि वह रात को भेष बदलकर गज़नी की गलियों में घूमा
करता था. एक रात उसे कुछ आदमी छुपते-छुपाते चलते दिखाई दिये. वह भी उनकी तरफ
बढ़ा. ...
1 week ago
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आसमान फाड़ डालेंगे किसी दिन
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हम अचानक किसी शहर की छत पर
रंगीन आसमान के नीचे
अपने सपने काट रहे होते हैं
तुम्हारे सुन्दर हाथों में हमारे मालिकों,
हमें बताओ कि
हमें क्या सोचना है और...
1 week ago
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संत महात्मा बनने का घोषणा पत्र
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सन्त बनने की बात मैने अपने पुराने लेख मे कही थी यह व्यवसाय लाभप्रद भी है,
इसमे भारत की जनसंख्या को देखते हुए संतो की बडी डिमाण्ड है यदि 10 लाख के औसत
पी...
1 week ago
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ये क्या उपयोग हुआ?
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टोपोलोजी शुद्ध गणित का एक विशुद्ध टाइप का ब्रांच होता है. एकदम अमूर्त... वो
गणित जो बस इसलिये पढ़ा-पढ़ाया और विकसित किया जाता है क्योंकि बस गणित है. सालों
...
1 week ago
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शराब और शराब
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पिछला पूरा महीना शराब और शराबियों की संगत में कटा है और अक्सर शराब सेरिब्रल
कोर्टेक्स तक ही पहुंची मगर कई बार भेजे में हिप्पोकाम्पस तक भी पहुंची और ऐसे
हर ...
1 month ago
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Curtain Down
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The 5 month old reality show air on MAHUA chanel, SUR-SANGRAM, came to an
end last night. The grand finale was organised here in the historic Gandhi
Maidan...
3 months ago
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सत्यकाम, भैंसे की सवारी और यमराज......
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मेरे नश्वर पाठक,
आज ठान कर बैठा हूँ कि इस पोस्ट में कुछ नहीं लिखूंगा अपने काम या काम की जगह
के बारे में.....
हाँ तो,....उत्तम प्रदेश के एक मंझोले शहर में ...
5 months ago
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जीवन की नई कड़ी, नया सफर
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*मीतेन्द्र नागेश*
ब्लॉगर बंधुओं व दोस्तों, इस पोस्ट में मुद्दा न राष्ट्रीय है और न
अंतरराष्ट्रीय। क्षेत्रीय भी नहीं है और न ही स्थानीय। मुद्दा है व्यक्तिगत।...
9 months ago
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ठेकेदार श्रमिकों के लिए न्याय की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं
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*बालकिशन पूछते हैं--
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मैं एक कंपनी में 6 साल से कार्यकर रहा हूँ, मेरा केवल ठेकदार बदला जाता है और
कार्मिकों को नहीं बदला जाता है। जब संविदा समाप्त होता ...
4 hours ago
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एक वह होली - समापन खंड
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एक वह होली की पहली कड़ी में आपने पढ़ा कि दिल्ली से आये वज्रांग ने बरेली की होली में बड़े उत्साह के साथ पहली बार मोर्चा लड़ा था. अब आगे पढ़ें...
मोर्चे खेल-खेल...
6 hours ago
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कार्बन त्याग के क्रेडिट का दिन
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हिमालय पिघलेगा या नहीं, पचौरी जी १.६ किमी के लिये वाहन का प्रयोग कर रहे हैं,
भैया आप पोस्ट-पेड़ हो या प्रि-पेड़ हो, सी एफ एल लगाइये, बिजली और पानी
बहुमूल...
6 hours ago
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जब आंख ही से न टपका, तो फिर लहू क्या है....
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[image: red-rose-side] *पिछली कड़ी-**पहले से फौलादी हैं हम…**से आगे*
सं स्कृत की लोह् धातु में मूलरूप से लाल रंग का भाव है। वैसे इसका अर्थ है
किसी भी किस्म...
6 hours ago
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क्या इन्हीं पाकिस्तानियों के लिये मरे जा रहे हैं शाहरुख खान…?? Paki Players,
IPL, Shahrukh Khan, Aman ki Asha, year after 26/11
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शाहरुख खान को पाकिस्तानी खिलाड़ियों को न लिये जाने पर भारी निराशा हुई है (भले
ही खुद ने न खरीदा हो)। अच्छे सम्बन्ध बनाने के नाम पर भारत की *“नॉस्टैल्जिक
फ़ौज...
1 day ago
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....'विज्ञान प्रगति' ने भी ब्लॉगिंग को किया सलाम।
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जी हाँ, भले ही तमाम ब्लॉगर आज भी विषय के अभाव में सिर्फ दूसरों पर कीचड़ उछाल रहे हों, पर इसमें कोई दो राय नहीं कि दिनों दिन 'ब्लॉगिंग' की महत्ता बढ़ती जा रही...
1 day ago
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गुरमा: कुछ तस्वीरें -२
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एक अवसाद भरी यात्रा की कुछ तस्वीरें आप पहले देख चुके हैं. अब देखिये दूसरा
हिस्सा।
*सभी को डबल क्लिक कर के बढाया जा सकता है।
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पहलवान नाऊ का लड़का सबसे बाएँ...
4 days ago
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paid news के खिलाफ- अरविंद मोहन,मेधा पाटकर, आनंद प्रधान,वर्तिका नंदा,अमृता राय और चैतन्य प्रकाश
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इस देश में दो प्रतिशत भी पत्रकार सही तरीके से आवाज उठाने लग जाएं,ईमानदारी से
अपने काम करने लग जाएं तो मीडिया की तस्वीर बदल जाएगी। मेधा पाटकर के ऐसा कहने
...
5 days ago
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इन्ही के लिए सब इतना हलकान है???
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शाहिद आफरीदी हैं न. अरे वो पाकिस्तान वाले. अरे वही जो यंग हैं. अरे यार, वही
विश्व के नंबर एक खिलाड़ी.... अरे गजब हो.... नंबर एक क्या केवल तेंदुलकर ही हो ...
1 week ago
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खिचड़ी पोस्ट
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पिछले दिनों कई बातें ऐसी रहीं जिन्हे ब्लाग पर डालना चाहता था लेकिन मसरूफ़ियत
के चलते टलती रहीं। आज काम पूरा हो गया और दिल्ली रवाना हो रहा हूँ तो सनद के
तौर ...
1 week ago
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सैकड़ों वर्ष पहले के इंजीनियर ही बेहतर थे
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यह चिट्ठी सालों पुराने पानी संचय करने के तरीके को बता रही है। यह आज भी
प्रसांगिक है। yeh chitthi puraane paani sanchay karne ke treeke ko bataa
rahee hai. ...
1 week ago
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My Weekly Twitter Updates for 2010-01-31
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@thg250 Thanks Tom. Wish there were a Windows counterpart too. in reply to
thg250 # Is there any affordable/open source substitute for Adobe Indesign
that ...
1 week ago
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आसमान फाड़ डालेंगे किसी दिन
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हम अचानक किसी शहर की छत पर
रंगीन आसमान के नीचे
अपने सपने काट रहे होते हैं
तुम्हारे सुन्दर हाथों में हमारे मालिकों,
हमें बताओ कि
हमें क्या सोचना है और...
1 week ago
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फिर मिले सुर…
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मिले सुर मेरा तुम्हारा… कुछ याद आया? राष्ट्रीय एकता और सदभावना पर 1988 मे
बना यह गीत जब पहली बार पंद्रह अगस्त को दिखाया गया तो कई लोगो ने सोचा कि यह
कांग्र...
1 week ago
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२०१० मे वेलकम तो ईटानगर
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itanagar मे आप सबका स्वागत है । अब ईटानगर का नाम तो सुना ही होगा ,और अगर
नहीं सुना है तो हम बता देते है कि ईटानगर अरुणाचल प्रदेश की राजधानी है और ५
जनवरी क...
3 weeks ago
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गलत नीति से सही समाधान की उम्मीद
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केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि वो, टीचरों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर
65 साल कर दें। साथ ही प्रोफेसरों को 70 साल तक पढ़ाने दिया जाए। केंद्र सरकार
का...
3 weeks ago
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मन को पतंग बना लो
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*
उड़ती है वह बेख़बर
जैसा उड़ाने वाला चाहे
कितना समर्पण है उसमें
न कोई चाहना
न कोई शर्त
हवा के रूख़ को
हमसफ़र बना कर
उड़ती रहती है
वह अ...
3 weeks ago
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डा: कुमार विश्वास की एक रचना, कवि सम्मलेन को याद करते हुए......
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क्या कवि सम्मेलनों का दौर ख़त्म होता जा रहा है, एक समय था जब छोटे छोटे
शहरों में कवि सम्मेलनों और मुशायरों की वजह से शहर में चहल पहल खूब
हुआ करता था, वाह...
1 month ago
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निसर्ग ही मेरे लिए...
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वह
देखती है
चाँद को
चाँद
कहीं अधिक
रौशन हो जाता
रिक्त में रंग सजाता है
सफ़ेद अब
सफ़ेद नहीं रह पाता
उसकी उफ़ से
दामन में स्याह भर
आकाश को
गहराता है...
2 months ago